छत्तीसगढ़ का इतिहास | History of Chhattisgarh | बौद्ध, जैन और महाजनपद काल | cg gk

छत्तीसगढ़ का इतिहास | History of Chhattisgarh | बौद्ध, जैन और महाजनपद काल 

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आज के इस लेख में छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास  सम्बंधित कुछ जानकारी साझा किया है।  छत्तीसगढ़ में बौद्ध काल , छत्तीसगढ़ में जैन काल , छत्तीसगढ़ में महाजनपद काल से सम्बंधित है। 

छत्तीसगढ़ में बौद्ध काल 

बौद्ध ग्रन्थ अवदान शतक के अनुसार महात्मा गौतम बुद्ध दक्षिण कोसल आये थे, यह जानकारी व्हेनसांग के यात्रा वृतांत में मिलता है। 

639 ईस्वी में व्हेनसांग ने सिरपुर एवं मल्हार की यात्रा की। 

छठवीं शताब्दी में बौद्ध भिक्षु प्रभु आनंद ने सिरपुर में स्वास्तिक बिहार एवं आनंद कुटी विहार का निर्माण करवाया। 

भोगापाल बौद्ध विहार कोंडागांव में है। 

छत्तीसगढ़ में जैन काल 

गुंजी ( दमउदरहा ) - यह जांजगीर चाम्पा जिले में सक्ति समीप है। यहां जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव का साक्ष्य मिलता है। 

भाटागुड़ा - भाटागुड़ा बस्तर जिले में है यहां जैन धर्म के 16 वे तीर्थंकर शांतिनाथ का साक्ष्य मिला है।
 
नगपुरा - नगपुरा दुर्ग जिले में है, यहां जैन धर्म के 23 वे तीर्थंकर पार्श्वनाथ का साक्ष्य मिला है। 

आरंग - आरंग रायपुर जिले में है , यहां जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर महावीर स्वामी जी का साक्ष्य मिला है। 

छत्तीसगढ़ में महाजनपद काल 

महाजनपद काल में सम्पूर्ण भारत को 16 महाजनपद में विभक्त किया गया था। इस काल में छत्तीसगढ़ चेदि महाजनपद के अंतर्गत आता था। 
 
चेदि महाजनपद की राजधानी सुक्तिमती थी, जिसका क्षेत्र बुंदेल खंड का पठार वाला क्षेत्र था। 
महाजनपद काल में छत्तीसगढ़ को चेदिसगढ़ के नाम से जाना जाता था।  इतिहासकार हीरालाल जी के अनुसार चेदिसगढ़ के अपभ्रंश से छत्तीसगढ़ हो गया। 

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