छत्तीसगढ़ का इतिहास | History of Chhattisgarh | MOURYA DYNASTY | मौर्य काल, सातवाहन काल | cg gk

छत्तीसगढ़ का इतिहास | History of Chhattisgarh 

मौर्य काल सातवाहन काल


MOURYA EMPIRE & SATVAHAN DYNASTY / मौर्य साम्राज्य एवं सातवाहन साम्राज्य 

आज के इस लेख में हम छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास को समझने का प्रयास करेंगे। जो छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास से मौर्य साम्राज्य / मौर्य काल और सातवाहन काल या सातवाहन वंश के शासकों के घटनाक्रम पर प्रकाश डालने की कोशिश करेंगे।  
इसमें हम देखेंगे छत्तीसगढ़ में मौर्य काल , मौर्य कालीन प्राप्त साक्ष्य जैसे - सिक्के, अभिलेख, शिलालेख, ताम्रपत्र आदि। 
उसके बाद सातवाहन वंश से सम्बंधित छत्तीसगढ़ में प्राप्त साक्ष्य जैसे - सिक्के, अभिलेख, शिलालेख, ताम्रपत्र आदि। 

छत्तीसगढ़ में मौर्य काल 

मौर्यवंशीय राजा चन्द्रगुप्त मौर्य एक महान शासक थे।  उन्हें भारत का प्रथम ऐतिहासिक सम्राट होने का गौरव प्राप्त है। आचार्य चाणक्य की सहायता से सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने नन्द वंश से विजयी प्राप्त कर लिया और अपना अधिपत्य जमाया। 

ऐसा माना जाता है की प्राचीनकाल में दक्षिणकोसल (छत्तीसगढ़) में मौर्य वंश का संभवतः शासनकाल रहा होगा , यह जानकारी चीनीयात्री व्हेनसांग  यात्रा वृत्तांत एवं जोगीमारा एवं सीताबेंगरा की गुफाओं में मिले मौर्यकालीन साक्ष्य से  मिलते हैं। जोगीमारा की गुफा एवं सीताबेंगरा की गुफा सरगुजा जिले में रामगढ़ की पहाड़ी में है। 

छत्तीसगढ़ में प्राप्त मौर्यकालीन साक्ष्य -

  • जांजगीर चाम्पा - जांजगीर चाम्पा जिले अकलतरा और ठठारी से मौर्यकालीन सिक्के प्राप्त हुए हैं। 
  • अकलतरा और तारापुर में चांदी के सिक्के मिले हैं। 
  • रायगढ़ जिले के बारगाव से भी मौर्यकालीन सिक्के मिले हैं। 
  • आहत मुद्राएं - आरंग, उड़ेला और तारापुर नामक  स्थानों में मौर्यकालीन आहत मुद्राएं मिले हैं। 
  • डॉ रमेंद्र नाथ मिश्र ने 1969 - 70 में आहत सिक्कों की खोज की थी। 

मौर्यकालीन शिलालेख -

सरगुजा जिले में स्थित रामगढ की पहाड़ी में स्थित जोगीमारा की गुफा में एक शिलालेख मिला है जिसकी भाषा पाली एवं लिपि ब्राम्ही है। जिसमें नर्तक देवदत्त एवं उनकी प्रेमिका नर्तिका सुतनुका का प्रेमगाथा का वर्णन मिलता है।  

इस स्थान को देश की प्राचीनतम नाट्य शाला भी माना जाता है , इसी स्थान पर महाकवि कालिदास जी ने अपने प्रसिद्द ग्रंथ "मेघदूतम" की रचना की थी, जिसका छत्तीसगढ़ी रूपांतरण मुकुटधर पांडेय जी ने किया। 

सातवाहन काल 

मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद दक्षिण भारत में सातवाहन वंश का उदय हुआ।  ऐसा माना जाता हैं की सातवाहन साम्राज्य का दक्षिणकोसल (छत्तीसगढ़) में भी सम्भवतः अधिपत्य रहा होगा। 

सातवाहन वंश शासकों ने अपनी राजधानी प्रतिष्ठान वर्तमान महाराष्ट्र क्षेत्र को बनाया था। 

छत्तीसगढ़ में प्राप्त सातवाहनकालीन साक्ष्य  -

सातवाहनकालीन शिलालेख -  

गुंजी शिलालेख - गुंजी को दमउदरहा के नाम से भी जाना जाता है। यह जांजगीर चाम्पा जिले के सक्ति के निकट है। 

गुंजी शिलालेख प्राकृत भाषा में उत्कीर्ण शिलालेख है। 

सातवाहनकालीन मुद्रा - 

राजा अपीलक की मुद्रा बिलासपुर जिले के मल्हार और जांजगीर चाम्पा जिले के बालपुर से प्राप्त हुये हैं। 

रोमकालीन स्वर्ण मुद्राएं बिलासपुर जिले के चकरबेड़ा से प्राप्त हुए है। 

सातवाहनकालीन स्तम्भलेख -

काष्ठस्तम्भ - जांजगीर- चाम्पा  जिले के किरारी ग्राम के एक तालाब में सातवाहनकालीन काष्ठस्तम्भ प्राप्त हुआ है, जिसे वर्तमान में महंत घासीदास संग्रहालय रायपुर में संरक्षित है। 

स्थापत्य -

पांचमंजिला संघाराम बौद्ध भिक्षुक नागार्जुन के लिए  बनवाया गया था। 

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