भारत का जैव भौगोलिक वर्गीकरण ( geographical classification of biodiversity) | जैव विविधता के तप्त स्थल /Hotspot of Biodiversity | वैश्विक जैव विविधता|जैव विविधता को क्षति / जैव विविधता का क्षरण आवासीय क्षति/ विखंडन

 भारत का जैव भौगोलिक वर्गीकरण ( geographical classification of biodiversity)


भारत में सन् 2002 में जैव विविधता अधिनियम पारित किया गया ।

जैव विविधता की दृष्टि से भारत में कुल 10 जैव भौगोलिक क्षेत्र स्थापित किए गए हैं और 25 प्रदेश स्थापित किए गए हैं -


10 जैव भौगोलिक क्षेत्र


1.ट्रांस हिमालय 

2.हिमालय 

3.मरुस्थल 

4.गंगा का मैदानी क्षेत्र 

5.अर्ध शुष्क क्षेत्र 

6.पश्चिमी घाट 

7.दक्कन प्रायद्वीपीय पठार - क्षेत्रफल की दृष्टि से बड़ा (43%)

8.उत्तर पूर्वी क्षेत्र 

9.दीप समूह

10.तटीय क्षेत्र - सबसे छोटा क्षेत्र 
जैव विविधता संरक्षण के राष्ट्रीय प्रयास

इन दस जैव भौगोलिक क्षेत्र को पाँच 5 इकोलॉजिकल रीजन में रखा गया है ।

1.हिमालय पर्वत क्षेत्र 

2.प्रायद्वीपीय भारतीय उपप्रदेश 

3.उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन /इंडो मलायन  उपप्रदेश 

4.अंडमान निकोबार दीप समूह 

5.सुंदरवन मैंग्रोव

जैव विविधता के तप्त स्थल /Hotspot of Biodiversity


ऐसे स्थान जहां पर स्थानीय जातियों की अधिकता पायी जाती है लेकिन जीव जंतुओं के अस्तित्व पर संकट निरंतर बना हुआ है।

हॉटस्पॉट का नाम सर्वप्रथम 1988 में पर्यावरण विद नॉर्मल मायर्स द्वारा दिया गया ।

भारत के प्रमुख चार Hotspot


  • 1. पूर्वी हिमालय - सबसे प्राचीनतम

  • 2. पश्चिमी घाट - सबसे ज्यादा जैव विविधता

  • 3. इंडो बर्मा क्षेत्र 

  • 4. सूडालैंड - अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह इंडो वर्मा तथा सुंडालैंड का ही भाग है और यह सबसे नवीनतम है।

हॉटस्पॉट का दर्जा


वहां कम से कम 0.5% का स्थानीय रूप में 1500 पौधे हो।

70% प्रजाति समाप्त हो चुकी हो। 

पूरे विश्व में वर्तमान में 36 हॉटस्पॉट हैं। 

Hope spot - समुद्री संवेदनशील क्षेत्र


  • मिशन ब्लू के तहत Hopespot का संरक्षण किया गया।
  • भारत का पहला Hopespot अंडमान निकोबार एवं दीप समूह ।

वैश्विक जैव विविधता


विश्व को जैव विविधता की दृष्टि से चार क्षेत्रों में विभाजन किया गया है- 

  • 1. अत्याधिक जैव विविधता वाले क्षेत्र
  • 2. अधिक जैव विविधता वाले क्षेत्र
  • 3. कम जैव विविधता वाले क्षेत्र
  • 4. निम्न जैव विविधता वाले क्षेत्र

1.अत्याधिक जैव विविधता वाले क्षेत्र को चार भागों में बांटा गया है 

  1. उष्ण कटिबंधीय वर्षावन
  2. प्रवाल भित्ति
  3. आर्द्र भूमि
  4. उष्णकटिबंधीय सागरीय

2.अधिक जैव विविधता वाले क्षेत्र 

इसके अंतर्गत प्रमुख जीव गेंडा, शेर, चिता ,तेंदुआ ,हाथी तथा जंगली भैंसे आदि शामिल हैं। 

इसके अंतर्गत प्रमुख वृक्ष ।जैसे - साल ,शीशम, महुआ, पलास, पीपल, बरगद आदि शामिल हैं ।

प्रसिद्ध घास के मैदान जैसे - स्टे्प्पी,वेल्ड ,पम्पास आदि पाए जाते हैं। 

3. कम जैव विविधता वाले क्षेत्र 

वे क्षेत्र जो मरुस्थलीय क्षेत्र उप द्वितीय क्षेत्र हो ।

4. निम्न जैव विविधता वाले क्षेत्र

उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव ।

जैव विविधता को क्षति / जैव विविधता का क्षरण आवासीय क्षति/ विखंडन


मानव जनसंख्या में लगातार वृद्धि हो रही है तथा मानव द्वारा अधिकांश प्राकृतिक परितंत्रों के अति उपयोग से प्राकृतिक क्षति हो रही है ,इससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रही है ।जैसे मैंग्रोव की कटाई से मछलियों की प्रजनन के लिए आवास की कमी हो रही है ।आवास विखंडन वह प्रक्रिया है, जिसमें विशाल क्षेत्र का आवास दो या अधिक आवास क्षेत्रों में टूट जाता है, जिसमें जय विविधता का अलग अवस्था प्रकट होता है और जैव विविधता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है ।

वनों का विनास


उष्णकटिबंधीय देशों में तथा भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में आदिवासियों द्वारा अधिक मात्रा में की जाने वाली झूम कृषि ( स्थानांतरित कृषि ) जैव विविधता के प्रमुख कारण हैं  

वन्यजीवों को क्षति/ शिकार

वन्य जीवों का शिकार भारी आर्थिक लाभ के कारण किया जाता है , जैसे बाघों की खाल एवं हड्डियों ,हाथी के दांत ,गेंडों के सींग, कस्तूरी मृग कस्तूरी के लिए क्या जा रहा है ।विदेशों में व्यापक उपयोग होता है ।

प्रदूषण


वायु, जल  मृदा व ध्वनि प्रदूषण भी जैव विविधता क्षरण के लिए उत्तरदाई है ।

किसी क्षेत्र में उपयोग किए जाने वाले हानिकारक कीटनाशक जिनके कारण कृषि स्टार पर जैव विविधता को हानि पहुंचाती है। 
जैव विविधता का संरक्षण (Conservation of biodiversity)| संस्थितिक संरक्षण ( संस्थानिक) या स्व - स्थाने ( In - situ conservation) असंस्थितिक संरक्षण या वर - स्थाने ( Ex- situ conservation )

विदेशी प्रजातियों के प्रवेश से


विदेशी प्रजातियों के प्रवेश से जैव विविधता का क्षय होता है ।

ये स्थानीय प्रजातियों को नष्ट कर देते हैं। 


अनियंत्रित पशुचराई ।


कीटनाशक और ग्लोबल वार्मिंग भी जैव विविधता के क्षरण का मुख्य कारण है।

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