CHHATTISGARH KI VISHESH PICHADI JANJATI छत्तीसगढ की विशेष पिछड़ी जनजातियाँ | जनजाति भाग 2

छत्तीसगढ की विशेष पिछड़ी जनजातियाँ 

छत्तीसगढ में विशेष पिछड़ी जनजातियों की संख्या 7 है .

अबुझमाड़ियां -

यह केंद्र सरकार द्वारा घोषित विशेष पिछड़ी जनजाति है .
अबूझमाड़ियां का अर्थ होता है - अज्ञात .
इनका संकेन्द्रण नारायणपुर एवं बीजापुर जिला में है .
इनकी कृषि पद्धति को पेद्दा कहते है.
अभुझमाड़ क्षेत्र को मेटाभूम के नाम से भी जानते है .
घोटुल में तालुरमुन्तोदेव की पूजा होती है .

बैगा-

यह केंद्र सरकार द्वारा घोषित विशेष पिछड़ी जनजाति है .
इनका संकेन्द्रण राजनान्दगांव ,कवर्धा ,मुंगेली एवं बिलासपुर में है.
ये गोंड़ो के पुरोहित का कार्य करते है .
बैगा जनजाति सर्वाधिक गोदना प्रिय जनजाति है .
महिलाओं का वस्त्र को कपची कहते है .
इनका प्रमुख देवता -बुढादेव ,भूमि रक्षा के देवता -ठाकुरदेव,बिमारियों से रक्षा के लिए -दूल्हादेव .
प्रमुख नृत्य करमा एवं अन्य नृत्य -बिल्मा ,सैला ,परघौनी एवं फागगीत भी प्रचलित है .
सुबह का भोजन -बासी ,दोपहर का भोजन -पेज ,रात्री का भोजन -बियारी.
प्रमुख पेय पदार्थ - ताड़ी . 
छत्तीसगढ में रामायण काल  

बिरहोर

यह केंद्र सरकार द्वारा घोषित विशेष पिछड़ी जनजाति है .
इनका संकेन्द्रण कोरबा ,रायगढ़ एवं जशपुर में है .
इसका सामान्य अर्थ बनचर /जंगल का तन /जंगल का आदमी .
बिर का अर्थ जंगल एवं होर का अर्थ तन /आदमी .
द बिरहोर - s .c.रॉय ने लिखी .
CHHATTISGARH KI VISHESH PICHADI JANJATI
VISHESH PICHHDI JANJATI

कमार -

यह केंद्र सरकार द्वारा घोषित विशेष पिछड़ी जनजाति है .
इनका संकेन्द्रण गरियाबंद जिले के बिन्द्रनावागढ़ एवं देवभोग तहसील में है ,आंशिक रूप से धमतरी जिले में भी निवास करते है .
कमार जनजाति के दो उपवर्ग है - 1.बुधरजिया 2.मकाडिया .
बुधरजिया - बन्दर मास नही खाते है .
मकाडिया - बन्दर मास खाते है
.
इनका घर बांस लकड़ी ,मिटटी एवं घास के बने होते है .
इनके घर में मृत्यु होने पर घर का त्याग कर देते है .
इनका प्रमुख कार्य बॉस शिल्प है .
पंचायत प्रधान को कुरहा कहते है .
कमार जनजाति में घोडा छूना निषेध माना जाता है .
कमार नृत्यों में मादर प्रमुख वाद्ययंत्र है .
ये लोग हरेली के अवसर पर गेड़ी नृत्य करते है .

कोरवा -

यह केंद्र सरकार द्वारा घोषित विशेष पिछड़ी जनजाति है .
इनका संकेन्द्रण जशपुर ,सरगुजा ,सूरजपुर,बलरामपुर,कोरिया एवं रायगढ़ में है.
कोरवा जनजाति के दो उपवर्ग है - 1.पहाड़ी कोरवा 2.दिहाड़ी कोरवा.
कोरवा जनजाति के लोग पेड़ों के ऊपर मचान बनाकर रहते है .
कोरवा जनजाति में मृत संस्कार को नवाधानी कहते है .
क्रियाकर्म के समय कुमारीभात की परम्परा है .
कोरवा जनजाति में विवाह के अवसर पर दमनच नृत्य किया जाता है , दमनच नृत्य भयोत्पादक नृत्य है .
कोरवा जनजाति में ढूकू विवाह प्रचलित है .
ये लोग पंचायत को मयारी कहते है .
शरीर में आग से निशान बनाया जाता है जिसे दरहा कहते है.
इन लोग का मुख्य पेय पदार्थ हडिया है .
ये लोग सिंगरी त्यौहार प्रति 5 साल में एक बार मनाते है .

छत्तीसगढ़ में प्रथम  

पंडो-

यह राज्य सरकार द्वारा घोषित एक विशेष पिछड़ी जनजाति है .
ये लोग अंबिकापुर क्षेत्र में निवास करते है .

भुंजिया -

यह राज्य सरकार द्वारा घोषित एक विशेष पिछड़ी जनजाति है .
गरियाबंद क्षेत्र में निवास करते है .
रोग का इलाज तपते लोहे से दाग कर किया जाता है.
ये लोग रसोई घर को लाल बंगला कहते है .


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