जोगी बिठाई: क्या है जोगी बिठाई रस्म

जोगी बिठाई-
बस्तर दशहरा का महत्वपूर्ण रस्म है जोगी बिठाई।
नवरात्र के पहले दिन ही सिरासार भवन में जोगी बिठाई का कार्यक्रम होता हैं।
आश्विन शुक्ल प्रथमा से दशहरा में नवरात्र कार्यक्रम प्रारंभ होता है।
नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना की जाती है। जगदलपुर के दंतेश्वरी मंदिर में हवन पूजा पाठ पुरे नौ दिनों तक चलते रहते है।
इस कार्यक्रम मे गांव का व्यक्ति विधि विधान से जोगी के रूप में बिठाया जाता है।
सिरासार भवन में एक आदमी अंदर समाने लायक गडढा खोदा जाता है ।
पीढ़ियो से आमाबाल एवं पराली गांव के ग्रामीण जोगी बनते है।
जोगी नौ दिनों तक वहीं गढडे में रहता है।
जिसके लिये दुग्ध एवं फलों की व्यवस्था रहती है।
चारों तरफ कपड़ा लगाया जाता है ताकि उसे बुरी नजर से बचाया जा सके।
जोगी बिठाई के बारे में कहा जाता है कि दशहरा निर्विघ्न संपन्न हो , इसलिये वह अपने ढंग से योग साधना में बैठ जाया करता था।
वह नौ दिन तक योगासन में बैठा रहता है।
इसी से जोगी बिठाई का प्रथा चल पड़ी।
विशेष-जोगी बिठाते समय सात मांगूर मछली काटने का रिवाज है।
जोगी बिठाई कार्यक्रम की मान्यता है कि जोगी के तप से देवी प्रसन्न होती है और दशहरा निर्विघ्न संपन्न होता है।

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धन्यवाद!

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