कृषि सम्बंधित विभिन्न क्रांतियाँ

विभिन्न क्रांतियाँ

हरित क्रांति (GREEN REVOLUTION)

  • हरित क्रांति के प्रणेता डॉ एम.एस.स्वामीनाथन है .
  • विश्व में हरित क्रांति के प्रणेता नारमन  बोरलोग है .
  • इसकी शुरुवात योजना अवकास के दौरान (1966 -67) में हुई .
  • इससे अधिक लाभान्वित होने वाले गेहूं ,धान है .

प्रोग्राम विवरण

  • उन्नत बीज उर्वरक कीटनाशकों व सिंचाई प्र आधारित नवीन पद्धति को पहले पहल पायलट योजना के रूप में वर्ष 1960-61 में गहन कृषि जिला कार्यक्रम के चयनित 7 जिलों में लागू हुआ .
  • उत्पादकता वृद्धि के उत्साहवर्धक परिणामों के फलस्वरूप इस योजना को 1965 में गहन कृषि जिला कार्यक्रम द्वारा 114 जिलों में लागू हुआ .
  • रासायनिक उर्वरकों उन्नत बीजों व कीटनाशकों पर आधारित नवीन कृषि रणनीति को 1966- 67 में एक कार्यक्रम के रूप में लागू किया गया .
  • इस्सी समय से हरित क्रांति का आरम्भ माना जाता है .

हरित क्रान्ति की सीमाएं

  • हरित क्रांति का सर्वाधिक लाभ गेहू के उत्पादन को मिला जिससे उत्पादन एवं उत्पादकता दोनों में वृद्धि हुई .
  • चावल के उत्पादन में बहुत कम वृद्धि हुई व मूते अनाज - ज्वार ,बाजरा ,मक्का का उत्पादन या तो स्थिर रही या धीमी गति से वृद्धि हुई .
  • उन्नत बीज कार्यक्रम को गेंहू चावल मक्का बाजरा व ज्वार तक सीमित रहा तथा अन्य गैर - खाद्यान्न फसलें इससे दायरे से बाहर थी .
  • हरित क्रांति के प्रथम चरण में इसका प्रभाव कुछ क्षेत्रों तक सीमित रहा .
  • हरित क्रांति का कोई भी लाभ दालों को नही प्राप्त हो सका यहाँ तक कि दालों की उत्पादकता में कमी आई .

हरित क्रांति के लाभ

  • उत्पादन में वृद्धि .
  • कृषि बचत में वृद्धि .
  • खाद्यान में आत्मनिर्भरता.
  • रोजगार के अवसरों में वृद्धि .
  • आत्मविश्वास में वृद्धि .
  • सामाजिक संरचना में परिवर्तन.

हानि

  • केवल कुछ फसलों तक सीमित - गेंहू.
  • असंतुलित विकास :पंजाब ,हरियाणा ,उत्तरप्रदेश.
  • केवल खाद्यान फसलों में क्रांति.
  • पूंजीवादी कृषि को प्रोत्साहन .
  • केवल बड़े किसानों को लाभ .

श्वेत क्रान्ति (WHITE REVOLUTION)

  • इसके जनक डॉ वार्गिस कुरियन को माना जाता है .
  • इससे दूध की उत्पादन मेवृद्धि हुई .
  • इसका प्रारंभ गुजरात के आनंद से हुआ .
  • AMUL - AANAND MILK UNION LIMITED.

ऑपरेशन फ्लड /श्वेत क्रान्ति

  • इसका उद्देश्य दुग्ध उत्पादकों को लाभप्रद मूल्य दिलाकर दुग्ध उत्पादन बढ़ाना साथ ही अन्य कार्यक्रम चलाना था .

इससे होने वाले लाभ

  • दुग्ध उत्पादन बढ़ा किसानों को लाभकारी मूल्य मिला सहकारी संघों के माध्यम से बिचौलियों की व्यवस्था समाप्त एवं पारम्पारिक विपणन प्रणाली का प्रभावशाली विकल्प प्राप्त किसानों की आय बढ़ी .

समस्याएं

  • अच्छी नस्ल के पशुओं का अभाव चारा दुग्धोत्पादित वस्तुओं का उपभोग,उपकरणों का अभाव शिक्षा प्रसार अनुसंधान भाव दोष पूर्ण व्यवस्था .

अन्य क्रांति

नीली क्रान्ति   -    मत्स्य उत्पादन

पीली क्रांति    -    तिलहन उत्पादन

गुलाबी क्रांति  -    झींगा उत्पादन

भूरी क्रांति      -    उर्वरक उत्पादन

लाल क्रांति     -    मांस एवं टमाटर

रजत क्रांति     -    अंडा उत्पादन

गोल क्रन्ति      -    आलू उत्पादन

इन्द्रधनुष क्रांति - सम्पूर्ण क्रान्ति से सम्बंधित





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