लोकनाट्य

लोकनाट्य 

  • लोकनाट्य में नृत्य गायन व अभिनव सभी का समावेश होता है .जो की समान समारोह के रूप में तो कुछ स्थानीय कुरीतियों का प्रकाश में लाने के लिए एक नाट्य मंच के माध्यम से प्रस्तुत किए जाते हैं.
  • छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोक नृत्य का विवरण इस प्रकार है- 

नाचा 

  • नाचा छत्तीसगढ़ का सर्वप्रथम लोक नाट्य है.
  • नाचा के भीष्म पितामह दुलार सिंह मंदराजी हैं .
  • छत्तीसगढ़ का सर्वाधिक प्रचलित लोक नाट्य जो कि ग्रामीण अंचल में सर्वव्याप्त है.
  • यह मुख्यतःपुरुषों के द्वारा किया जाता है .परंतु अब महिलाएं भी नाट्य अभिनय करती हैं .

रहस 

  • रहस छत्तीसगढ़ राज्य का सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है .पौराणिक चरित्रों की मानव आकार प्रतिमाएं बनाते है.
  • यह राधा और कृष्ण की मनोहरी रासलीला की कथा का छत्तीसगढ़ रूपांतरण है .
  • रहस्य के रंगमंच को बेड़ा कहते हैं .
  • छत्तीसगढ़ में बाबू रेवाराम रचित रहस की पांडुलिपियां प्रचलित है .
  • इसमें विदूषक की भूमिका एक हास्य कलाकार के रुप में होती है .
  • यह लोकनाट्य उत्तर प्रदेश के रास लीला से अधिक प्रभावित है .

गम्मत 

  • गम्मत यह हाथ संयुक्त और व्यंग्यात्मक लोकनाट्य इसमें विदूषक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. 
  • नर्तिका की भूमिका भी पुरुष ही करते हैं. 
  • इसके दो रूप प्रचलित हैं पहली खड़े साज  एवं दूसरी बैठे साज . 

माओ पाटा 

  • यह मुरिया जनजाति की शिकार पर आधारित की नाट्य  है. 
  • जिसमें जंगली भैंसे एवं सांभर के शिकार का मंचन किया जाता है .

भतरा नाट 

  • यह बस्तर के भतरा जनजाति द्वारा किया जाता है .
  • इस नाट्य में केवल पुरुष ही भाग लेते हैं .
  • भतरा नाट कथानक युद्ध प्रधान होता है. 
  • इसकी कथावस्तु का स्रोत पौराणिक प्रसंग होता है.

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