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जनजातियों का लोकगीत,उपजाति एवं अन्य

जनजातियों का लोकगीत 

घोटुल पाटा 

  • मृत्यु के अवसर पर गाया जाता मुडिया जनजाति द्वारा गाया जाता है .

धनकुल /जागर गीत 

  • बस्तर अंचल में भतरा और हल्बा जनजाति द्वारा गाया जाता है .

रीलो गीत 

  • गोंड /मुरिया जनजाति द्वारा गाया जाता है .

जनजातियों की उपजाति

  1. उराव-नाहर ,कुडास,किसान.
  2. गोंड - अबुझमाड़िया,मुड़िया,माड़िया,कमार,अगरिया.
  3. कंवर - तंवर,पैंकरा,राठिया.
  4. बैगा - बिंझवार,घरौतिया,नरौतिया,कोडवन,कुण्डी,रैमेना,वादमैना.
  5. हल्बा - छत्तीसगढ़िया,बस्तरिया,मरेठिया.

जनजातियों का स्थान्तरित कृषि

  • छग में जनजातियों द्वारा किये जाने वाले कृषि को स्थान्तरित कृषि कहते है .इस प्रकार के कृषि को भारत में झूम के नाम से जाना जाता है.
  1. बैगा   -   बेवार
  2. कमार   -   दाहिया 
  3. अबुझमाड़िया   -   पेद्दा 
  4. कोरवा   -   देवारी 
  5. गोंड    -    धारिया व बेवार
  6. भतरा   -  दहिया

जनजाति सम्बंधित विशेष तथ्य 

  • अन्गादेव का निर्माण काष्ठ से किया जाता है.
  • कोरकू जनजाति में स्त्री पुनर्विवाह को पाटो विवाह कहा जाता है.
  • बस्तर के जनजाति को भूमि के नाम से भी जाना जाता है.
  • छग सरकार का जनजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान रायपुर में स्थित है .

 

प्रमुख आदिवासी व्यक्तित्व 

  • शहीद वीरनारायण सिंह  - सोनाखान विद्रोह के प्रमुख नेता(बिंझवार)
  • गुन्डाधुर - भूमकाल विद्रोह का प्रमुख नेता 
  • गेंदसिंह - परलकोट विद्रोह के नेतृत्वकर्ता
  • संत गहिरागुरु - कवंर
  • गहिरागुरु सम्मान पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हेतु दिया जाता है.


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