छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ 1 |CHHATTISGARH TRIBES

छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ

  • जनजातियों का नाम मध्य प्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 के तहत मिला .
  • छत्तीसगढ़ में 42 प्रकार की जनजातियां पाई जाती है एवम 161 उप समूहों में विभाजित है .
  • जनजाति संबंधित भारतीय संविधान प्रावधान अनुच्छेद 342 में है .
  • बस्तर को जनजातियों की भूमि कहा जाता है .
  • छत्तीसगढ़ में विशेष पिछड़ी जनजातियों की संख्या 7 है -
  • भारतीय संविधान के तहत राष्ट्रपति छत्तीसगढ़ की 5 जनजाति को विशेष पिछड़ी जनजाति के अंतर्गत शामिल किया गया है 
  • अबूझमाडिया
  • बैगा
  • बिरहोर 
  • कमार
  • कोरवा 
  • राज्य सरकार द्वारा 
  • भुंजियाऔर पंडोप

राज्य की प्रमुख जनजातियां 

गोंड 

  • गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी जनजाति है .
  • राज्य के कुल जनजाति का 56% गोंड है .गोंड स्वयं को कठोर कहते हैं जिसका अर्थ होता है पर्वत वासी.
  • गोंड जनजाति की प्रमुख देवता दूल्हादेव है साथ ही बड़ा देव ,नाग देव, नारायण देव आदि को मानते हैं .
  • मेघनाथ पर्व गोड़ जनजाति से संबंधित है. 

अबूझमाड़िया 

  • अबूझमाडिया मुख्य रूप से नारायणपुर एवं बीजापुर जिले में निवास करते हैं .
  • अबूझमाड़िया गोंड जनजाति की उपजाति है .इनकी कृषि पद्धति पेद्दा है.अबूझमाड़िया का  अर्थ होता हैअज्ञात..
  • अबूझ मारिया को मेताभुम के नाम से भी जाना जाता है.

बैगा 

  • बैगा जनजातियों का निवास मैकल पर्वत श्रेणी कवर्धा राजनांदगांव मुंगेली बिलासपुर जिले में है .
  • बैगा जनजाति गोंडो के पुजारी के रूप में कार्य करते हैं .सर्वाधिक गोदना प्रिय जनजाति बैगा है .
  • प्रमुख पेय पदार्थ ताडी है .बैगा का प्रमुख देवता बुढादेव है जो साल  वृक्ष में निवास करते हैं .भूमि की रक्षा के लिए ठाकुर देव की बीमारियों के रक्षा के लिए दूल्हा देव की पूजा करते हैं .
  • इनका प्रमुख नृत्य करमा है किंतु साथ ही साथ विल्मा सैला परघौनी एवं फाग भी प्रचलित था .

विरहोर

  • बिरहोर जनजाति का निवास मुख्यतः रायगढ़ जशपुर जिले में है. 
  • बिरहोर जनजाति पर द बिरहोर एस.सी.राय की रचना है .
  • बिरहोर का सामान्य अर्थ होता है वनचर . 

कमार 

  • कमार जनजातियों का निवास गरियाबंद जिले में बिंद्रा नवागढ़ देवभोग तहसीलों में एवं आंशिक रूप से धमतरी जिले में पाई जाती है .
  • कमार मुख्य रूप से गरियाबंद जिले में निवास करती है इनका प्रमुख कार्य बांस शिल्प कला है .
  • सर्वाधिक गोदना गोदवाने वाले जनजाति कमार होते हैं .
  • कमार जनजाति की पंचायत प्रधान कुरहा कहलाता है .घोड़ा छूना निषेध .
  • घर में मृत्यु होने पर घर का त्याग कर देते हैं .
  • कमार जनजाति के दो उपजाति हैं - 1)बुधरजियाये 2)मकाडीया 
  • बुधरजियाये बंदर मांस नहीं खाते जबकि मकडीया बन्दर  मांस खाते हैं.

कोरवा 

  • कोरवा जनजाति का निवास स्थान जशपुर सरगुजा सूरजपुर बलरामपुर रायगढ़ कोरिया जिले में है .
  • इनकी दो प्रजातियां हैं पहाड़ी कोरवा ,दिहाड़ी कोरवा. 
  • कोरवा जनजाति पेड़ों के ऊपर मचान बना कर रहते  हैं . मृत संस्कार को नवाधावी  कहते हैं. 
  • क्रिया कर्म के समय कुमारी भात की परंपरा है. विवाह के समय दमनंच नृत्य करते हैं. 
  • इनकी पंचायत को मयारी कहते हैं. शरीर पर आग से दाग का निशान बनाते हैं जिस दरहा कहते हैं. 
  • इनका मुख्य पेय पदार्थ होता है हडीया .यह लोग महादेव खुड़िया रानी सिंगिर देव की पूजा करते हैं .

भुंजिया 

  • राज्य सरकार द्वारा भूंजा जनजाति के विकास के लिए भुंजिया विकास अधिकरण संचालित किया जा रहा है .
  • भुंजिया जनजाति के लोग रोग का इलाज तपते लोहों से दागकर करते हैं .

पंडो 

  • यह जनजाति अंबिकापुर क्षेत्र में निवास करती है .राज्य सरकार द्वारा पंडो जनजाति के लिए पंडो विकास अधिकरण संचालित है .

हल्बा

  • हल्बा जनजाति मुख्य रूप से बस्तर कोंडागांव कांकेर बालोद क्षेत्र में निवास करती है .
  • हल्बा जनजाति का मुख्य व्यवसाय कृषि कार्य है .
  • हल्बा आर्थिक रुप से सबसे समृद्ध जनजाति है .हल्बा जनजाति के अधिकांश लोग मांस मदिरा का त्याग कर कबीरपंथी धर्म को अपना रही है .इनकी बोली हल्बी है. 
  • इसकी उपजाति बस्तरिया छत्तीसगढ़िया तथा मरेडिया है .

उराव 

  • उराव जनजाति मुख्य रूप से सरगुजा बलरामपुर जशपुर रायगढ़ क्षेत्र में निवास करती है. 
  • उराव जनजाति की युवा गृह धुमकूरिया है जिसके मुख्या को धौंगरगहतो कहते हैं .
  • सर्वाधिक शिक्षित जनजाति उराव जनजाति है .सरगुजा क्षेत्र में निवासरत प्रमुख जनजाति है .
  • सर्वाधिक धर्मांतरण उराव जनजाति किया हुआ है .उराव जनजाति की मुख्य देवता सरना देवी है .
  • उराव जनजाति द्वारा साल वृक्ष में फूल लगने के उपलक्ष्य में सरहुल नृत्य करते हैं .
  • उराव जनजाति की प्रमुख बोली कुरुख  है .यह जनजाति सरहुल नृत्य के साथ ही साथ करमा नृत्य करते हैं . 
  • विरन गीत करमा गीत  का हिस्सा है .गांव के प्रमुख मांझी कहलाती है .
  • प्रमुख पर्व खट्टी सरहुल एवं भाग है एवं पारंपरिक पोशाक करेया है.


शेष जनजाति अगले पोस्ट में देखे.




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