लोकगीत 1

पंडवानी

 महाभारत कथा का छत्तीसगढ़ी लोक रूप  पंडवानी है .
पंडवानी के रचयिता सबल सिंह चौहान है.
पंडवानी गीत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है इसके मुख्य नायक भीम तथा मुख्य नायिका द्रोपदी हैं .
पंडवानी के लिए किसी विशेष अवसर या अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं होती है.पंडवानी में एक मुख्य गायक ,एक हुंकार भरने  वाला रागी तथा वाद्य पर संगत करने वाले लोग होते हैं .

पांडवानी दो प्रकार से प्रचलित हैं-

वेदमती शैली 

इसके प्रमुख कलाकार- रितु वर्मा ,झाड़ू राम देवांगन, पुनाराम निषाद, रेवाराम साहू( इसमें केवल गायन कार्य होता है)

कापालिक शैली 

प्रमुख कलाकार तीजन बाई, शांतिबाई को उषाबाई आदि.( इसमें गायन एवं नृत्य दोनों होता है.
पंडवानी के प्रमुख वाद्य यंत्र -तंबूरा ,करताल .
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त करने वाले कलाकार झाडूराम देवांगन , तीजन बाई ,रितु वर्मा है .

ददरिया 

छत्तीसगढ़ के लोक गीतों का राजा कहते हैं ,सवाल-जवाब शैली पर आधारित होता है. इसे फसल बोते समय युवक युवतियों द्वारा अपने मन की बात पहुंचाते हैं.यह  श्रृंगार प्रधान होता है .ददरिया को प्रेम गीत के रूप में जाना जाता है .बैगा जनजाति ददरिया गीत के साथ नृत्य करते हैं. ददरिया की स्वीकृति छत्तीसगढ़ी लोक जीवन और साहित्य में प्रेम काव्य के रूप में हुई है. इसके प्रमुख कलाकार हैं लक्ष्मण मस्तुरिया, दिलीप षडंगी ,केदार यादव.

पंथी गीत

यह छत्तीसगढ़ अंचल में सतनामी पंथ द्वारा गाया जाने वाला विशेष लोकगीत है .पंथी नृत्य में नर्तक कलाबाजी करते हैं .पंथी नृत्य के अंतिम समय में पिरामिड बनाते हैं .
इसके गीतकार स्वर्गीय देवदास बंजारे पंथी नृत्य के जनक कहलाते हैं .
पंथी नृत्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त करने का श्रेय स्वर्गीय देवदास बंजारे जी को जाता है.
इसके प्रमुख वाद्य यंत्र है-मांदर,झांझ आदि .

चंदैनी गायन 

चंदैनी गायन छत्तीसगढ़ अंचल में लोरिक और चंदा के जीवन पर आधारित है, इसके कलाकार है चिंता दास इसके प्रमुख वाद्ययंत्र- टीमकी, ढोलक चंदैनी .गायन लोरिक चंदा के प्रेम प्रसंग पर आधारित है.

भरथरी गीत
इस लोकगाथा में राजा भरथरी और रानी पिंगला के वैरागी जीवन का है वर्णन किया गया .इसके गायक सूरज बाई खांडे है .
वाद्ययंत्र -एकतारा , सारंगी.

ढोला मारु 

यह ढोला मारू का प्रेम प्रसंग गायन है किन्तु यह  राजस्थानी लोक कला है.
प्रमुख कलाकार-सुरूजबाई खांडे.

बांस गीत

यह एक दुःख या करूँ गीत है ,छत्तीसगढ़ के राउत जाति द्वारा गाई जाती है बांस गीत में महाभारत के पात्र कर्ण  और मोरध्वज व शीतबंसत का वर्णन होता है. इसमें रागी  ,गायक और वादक तीनों  होते हैं.
कलाकार केजुराम यादव ,नकुल यादव.

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