छत्तीसगढ़ की गुफाएं



रामगढ की पहाड़ी (सरगुजा )
सीता बेन्गरा की गुफा -(सरगुजा )
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में रामगढ़ की पहाड़ियों पर स्थित सीता बेंगरा गुफा देश की सबसे पुरानी नाट्यशाला है. इसका गौरव इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह भी माना जाता है की महाकवि कालिदास ने अपने श्रेष्ठ कृति मेघदूत की रचना  यही किये थे .जिसका छत्तीसगढ़ी में रूपांतरण मुकुटधर पांडे द्वारा किया गया है .उन्होंने सरगुजा को स्वर्ग का द्वार कहा है.
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लक्ष्मनबंगरा की गुफा -(सरगुजा )
जोगीमारा की गुफा (सरगुजा )-
यहाँ मौर्यकालीन अभिलेख मिलते है .इसमें नृतक देवदत्त एवं नर्तिका सुत्निका का प्रेमगाथा का वर्णन है .इस अभिलेख की भाषा पाली एवं लिपि ब्राम्ही है .इस गुफा में चित्रित आकृति मूर्तिकला का उदहारण है .यह गुफा अजंता काल के समकालीन है .
सिंघनपुर की गुफा (रायगढ़)-
सिंघनपुर गुफा रायगढ़ जिले में स्थित है.सिंघनपुर में विश्‍व की सबसे प्राचीनतम मानव शैलाश्रय स्थित है.यह गुफा 30 हजार साल पुराना है. यहां पाषाणकालीन अवशेष पाये गए हैं तथा छत्‍तीसगढ़ में प्राचीनतम मानव निवास के प्रमाण मिले हैं.
इसके अतिरिक्त रायगढ़ में अन्य गुफा -कबरापहाड़ की गुफा ,बोतल्दा की गुफा ,बसनाझर ,टीपाखोल,ओंगना ,बेनिपाठ आदि .
 कैलाश गुफा(जशपुर,बस्तर,सरगुजा )
कैलाश गुफा बस्‍तर जिले के कांगेर घाटी राष्‍ट्रीय उद्यान में स्थित एक प्राकृतिक गुफा है. यह जिलामुख्‍यालय जगदलपुर से दक्षिण पूर्व की ओर फैली हुई तुलसी डोंगरी की पहाड़ी पर स्थित है. यह गुफा 250 मीटर लंबी तथा 35 मीटर गहरी है. इस गुफा में जगह- जगह शिवलिंग जैसी आकृतियां बनी हुई है, जिस कारण से इस गुफा को कैलाश गुफा के नाम से जाना जाता है.इस गुफा के बाहर कैलाश झील स्थित है . बस्‍तर के अलावा इसी नाम से एक और गुफा जशपुर जिले में भी स्थित है. यह गुफा रामेश्‍वर गुरू गहिरा बाबा आश्रम के नाम से जाना जाता है. संत गुरू गहिरा ने चट्टानों को तराश्‍कर इस गुफा का निर्माण किया था। इस गुफा के समीप ही गंगा झरना स्थित है, जो प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है
कुटुमसर गुफा(बस्तर )
 यह गुफा छत्‍तीसगढ़ के बस्‍तर जिले में स्थित है.यह गुफा बस्‍तर जिला के जिला मुख्‍यालय जगदलपुर से लगभग 38 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. कुटुमसर गुफा कांगेरघाटी राष्‍ट्रीय उद्यान में स्थित है. यह एक भू-गर्भित गुफा है जो  भारत की सबसे गहरी गुफा मानी जाती है. इस गुफा की गहराई जमीन से लगभग  60 फीट से 125 फीट तक है. इसकी लंबाई 4500 फीट है .गुफा की छत पर लटकते चूने के स्‍लेटमाईट एवं स्‍लेटराईट के स्‍तम्‍भ है, जो बहुत ही आकर्षक लगते हैं.यहां स्‍लेटराईट एवं स्‍लेटमाईट से विभिन्‍न प्रकार की आकृतियां बनी हुई, जो दर्शनीय है. इस गुफा की  द्वार बहुत ही छोटी है जिसमें एक बार में केवल एक ही आदमी प्रवेश कर सकते हैं किन्‍तु गुफा का अंदर का भाग बहुत ही बड़ा है, जिसमें सैकडों लोग एक साथ आ सकते हैं. इस गुफा में कहीं कहीं पर शिवलिंग के सामान आकृतियां बनी हुई है, जो शिवलिंग की मूर्तियों की समान दिखाई पड़ती है.
चितवा डोंगरी की गुफा -(राजनांदगांव )







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